स्पीडब्रेकर समझने की क्षमता का विकास करता है
स्पीड ब्रेकर तेज भागती गाडी की गति नियंत्रित करता है,चालक को पता है यहाँ यातायात संकेतक की उपेक्षा से जान,माल तथा वाहन भी क्षति होसकती है।जीवन,जीवन दर्शन और कर्म भी नियंत्रित होना चाहिए, ऐसा न हो सबकी चाहत हमे सकुंचित व एकांगी बनादे।शरीर,परिवार ,विचारधारा, पार्टी ,देश,समाज सबकी अपनी आवश्यकता है।हम सबकी अपेक्षा एक साथ नहीं पूरा कर सकते।हा सफल अवश्य कुछ हद तक होसकते है। यद्द्पि पश्चिम बंगाल चुनाव में अभी अनेक समीकरण उभरेंगे,वाम और कांग्रेस का तो बीजेपी और टीएमसी ने पीस कर पी लिया।यह बात सत्य है जिन अपेक्षाओं पर भाजपा नरेतृत्व भरशक बंगाल में ताकत का प्रयोग किया उसपर बंगाल खरा नही उतरा।पर सत्य तो यह है बीजेपी को पश्चिम बंगाल में अनपेक्षित सफलता भी मिली है। आलोचना किसी की भी होसकती है पर वह तार्किक तादात्म्य से होंनी चाहिए।डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी से लेकर आज तक पार्टी इसी दिशा में संघर्षरत रही आज वह हार कर भी जीत गयी।उसके पास कुछ भी गवाने को बंगाल में नही है हा केवल सत्ता से कुछ दूरी के।
हा एकबात अवश्य हुई वह यह कि आज से 20 बर्ष पूर्व हम टीवी देखने के लिए एंटीना का सहारा लेते थे ,यदि एंटीना सही दिशा में नही तो टीवी स्क्रीन पर कुछ भी नही दिखता ।बंगाल का एंटीना सही करने में आकलन कर्ताओं की चूक है।साथ ही कोई मेरी बात से सहमत हो या असहमत फर्जी राष्ट्रवाद कहे या छद्म,पर आज नही तो कल मानना पड़ेगा असम और पश्चिम बंगाल में रिहहिंया फेक्टर इंनकार नही करसकते।अकेले ममता की रणनीति रणनीतिकारों पर भारी पड़ी पर यह भी सत्य है पश्चिम बंगाल सुनियोजित वैचारिकी पर चल रहा है जिसपर देश की खुफिया एजेंसियां भी नही समझ पा रही।पर मतदाओं के एंटीना को समझने में बीजेपी की चूक तो है ही।पर अब बीजेपी को सत्ता के प्रवाह को कमकर वैचारिक प्रवाह व स्थानिय कार्यकर्ता के महत्व को स्वीकारना ही होगा।इसके लिए पार्टी अनुभवी जनो का सहयोग लेना ही होगा।और चारो धाम यात्रियों को हतोत्साहित भी।
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